कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर मुख्यमंत्री के दौरान रकम लेने का आरोप राजनीतिक मोड़ ले लिया है। शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आयकर विभाग के दस्तावेज दिखाते हुए यह दावा किया कि मई 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो दो प्रमुख कारपोरेट घरानों ने उन्हें भारी रिश्वत दी थी।
अपने पूर्व के विभाग, आयकर विभाग के सूत्रों का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीेवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आरोपों की जांच किए जाने की बजाय जांच को दबा दिया।
रांची में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिल्ली मुख्यमंत्री ने पीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी औद्योगिक घरानों को संकट से उबारने के मकसद से हुई है। जिन्होंने बैंक से लिए गए अपने ऋण को नहीं चुकाया है। केजरीवाल ने कहा कि धानमंत्री काले धन या भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के प्रति गंभीर नहीं हैं।
कालेधन को लेकर पीएम की गंभीरता पर सवाल खड़े करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अगर वह कालेधन को लेकर गंभीर होते तो सिर्फ उन्हें गिरफ्तार करते, जिनका काला धन स्विस बैंकों में जमा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पता है कि स्विस बैंक में खाते किसके हैं, लेकिन उन्होंने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया क्योंकि वे उनके मित्र हैं।
नोटबंदी को मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा रची साजिश बताते हुए केजरीवाल ने कहा कि नोटबंदी मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा रचाई गई साजिश है, ताकि 500 और 1000 रुपये के नोटों को बैंकों में जमा कराया जा सके और इनका इस्तेमाल कारपोरेट घरानों द्वारा लिए गए ऋण को माफ करने में किया जाए।
कैशलेस का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा कि नोटंबदी से अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है और इससे देश भर में 105 लोग मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को नकद में 70 प्रतिशत चंदा मिला है लेकिन वे लोगों को कैशलेस होने के लिए कह रहे हैं। मोदी के परिचित अपनी बेटियों की शादी में करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन वे हमसे कह रहे हैं कि अपनी बेटियों की शादी 2.5 लाख में करो।
स्रोत- आईएएनएस
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