नोटबंदी को गरीब विरोधी कदम बताते हुए बीते दिन पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से लिया गया नोटबंदी का फैसला स्थाई महत्व की त्रासदी है। इस त्रासदी ने देश के करोड़ों लोगों को दुखी कर दिया है। चिदंबरम ने कहा कि यह गरीब विरोधी कदम है और इसने करोड़ों किसानों, छोटे व्यापारियों और कामगारों को मुश्किलों में डाला है।
यह बातें मुंबई विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित डीटी लकड़वाला स्मारक व्याख्यान में भारत में आर्थिक सुधारों के 25 साल विषय पर व्याख्यान के दौरान कही।
नोटबंदी फैसले से कालाधन न समाप्त होने को लेकर चिदंबरम ने कहा कि नोटबंदी ने ऐसा मिथक बना दिया है कि सभी नगदी कालाधन है, जब कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे काला धन समाप्त नहीं होगा, क्योंकि वह रखा हुआ नहीं है, बल्कि बाजार में दौड़ रहा है और जब तक यहां काले धन की मांग रहेगी, तब तक उसकी आपूर्ति होती रहेगी।
नोटबंदी के समर्थकों पर निशाना साधते हुए चिदंबरम ने कहा कि लोग अब नए नोट में घूस लेते पकड़े जा रहे हैं। तो फिर नोटबंदी से क्या अंतर आया? जो लोग नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं, वे मामूली अर्थशास्त्र भी नहीं जानते।
मौलिक सुधार का आग्रह करते हुए चिदंबरम ने कहा कि 1991 के बाद से 11 मौलिक सुधार किये गए हैं और उन्होंने छात्रों से 12वां सुधार लाने का आग्रह किया। उन्होंने 11 महत्वपूर्ण सुधारों में औद्योगिक लाइसेंस का उन्मूलन, स्थिर विनिमय दर, कर की दरों में कमी, पीपीपी मॉडल, दूरसंचार में राज्य के एकाधिकार के उन्मूलन और निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में लाने का नाम लिया।
यहां मुंबई विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित व्याख्यान में विश्वविद्यालय के कुलपति संजय देशमुख सहित कई गणमान्य उपस्थित रहें।
स्रोत- आईएएनएस
|
|
Comments: