लंदन, 19 दिसम्बर (आईएएनएस)| कार्यस्थल पर प्रताड़ित किए जाने का प्रभाव पुरुषों और महिलाओं पर अलग-अलग तरह से पड़ता है। इसकी वजह से जहां महिलाएं लंबी सिक लीव पर चली जाती हैं या अवसादरोधी दवाइयां लेती हैं, तो पुरुष कुछ अवधि के लिए नौकरी छोड़ देते हैं। एक नए शोध में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह जानकर हैरानी हुई कि प्रताड़ित किए जाने से पुरुषकर्मी सिक लीव नहीं लेते।
डेनमार्क के आरहूस विश्वविद्यालय के व्यापार और सामाजिक विज्ञान स्कूल के सहायक प्रोफेसर टिने मुंडबर्ग एरिक्सन ने कहा, "वास्तव में ऐसा प्रतीत होता है कि महिलाओं की तुलना में प्रताड़ित किए जाने वाले पुरुष काम पर जाना पसंद करते हैं, जबकि वास्तविक रूप से वे परेशान होते हैं।"उन्होंने कहा, "साथ ही, प्रताड़ित किए जाने का पुरुषों के वेतन स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे संकेत मिलता है कि प्रताड़ित किए जाने से उनकी वेतन वृद्धि और पदोन्नति के अवसर प्रभावित होते हैं।"उन्होंने कहा कि एक तरह की प्रताड़ना यह भी है कि आपके सहकर्मी या आपके मालिक आपके कार्य करने की क्षमता में बाधा डालते हैं या महत्वपूर्ण कार्य दूसरे को दे देते हैं।इस अध्ययन के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के 3,000 लोगों को शामिल किया गया। इसमें सात फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें प्रताड़ित किया गया। इनमें 43 फीसदी पुरुष थे।एरिक्सन ने कहा, "लाख टके का सवाल यह है प्रताड़ना के प्रतिक्रिया स्वरूप पुरुष कार्यस्थल छोड़ देते हैं, जबकि महिलाएं लंबी सिक लीव पर चली जाती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पुरुष तथा महिलाएं प्रताड़ना से अलग-अलग तरीके से निपटती हैं।"यह शोध का पत्रिका 'जर्नल ऑफ लेबर इकोनामिक्स' में प्रकाशित किया गया है।--आईएएनएस
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