भोपाल, 19 दिसंबर (आईएएनएस)| मध्यप्रदेश के कान्हा-पेंच कॉरीडोर में तांत्रिकों के लिए एक माह में तीन बाघ और चार तेंदुए का शिकार किया गया। यह खुलासा वन विभाग के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) द्वारा तैयार अंतरिम जांच रिपोर्ट से हुआ। सिवनी-बालाघाट जिले में नवंबर माह में वन्य-प्राणी शिकार के संबंध में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी सुरक्षा) आर.पी. सिंह ने सेामवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) जितेंद्र अग्रवाल को एसटीएफ का अन्वेषण संबंधी अंतरिम प्रतिवेदन सौंपा है।
इस प्रतिवेदन में कहा गया है कि सात प्रकरण दर्ज कर 39 आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। आरोपी में चार तांत्रिक, 14 बिचौलिये और 21 शिकारी हैं। अब तक की जांच में तीन बाघ, चार तेंदुए और 200 जंगली सुअर के शिकार के तथ्य सामने आए हैं। साथ ही 11 जिंदा सुअर बम (विस्फोटक पदार्थ) जब्त किए गए हैं।इस प्रतिवेदन में बताया गया है कि तांत्रिकों ने आम लोगों में भ्रम फैलाया कि बाघ एवं तेंदुए की मूंछ के बाल, पंजे, नाखून, दांत एवं उनकी हड्डियों के तांत्रिक प्रयोग से व्यक्ति को अथाह पैसा, गड़ा हुआ धन, सट्टे में आमदनी बढ़ेगी।गिरोह ने वन्य-प्राणियों के अवयवों को विभिन्न कोडवर्ड दे रखे थे। मसलन बाघ की मूंछ के बाल को धागा, वायर व पंजे को मोटे टायर के नाम से जाना जाता था।--आईएएनएस
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