बैंकाक, 19 दिसंबर (आईएएनएस)| एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोमवार को कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या अल्पसंख्यक मुस्लिम के खिलाफ कथित हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध माना जा सकता है। समाचार एजेंसी एफे न्यूज के अनुसार, रिपोर्ट उस दिन जारी की गई, जब दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के विदेश मंत्री पश्चिमी राखिन प्रांत में रोहिंग्या की जारी समस्या पर ध्यान देने के लिए यांगोन में बैठक करने वाले हैं।
यह कहा गया है कि पड़ोसी बांग्लादेश हजारों शरणार्थियों को वापस भेज रहा है जिससे यह समस्या जारी है।म्यांमार और बांग्लादेश में रोहिंग्या मुसलमानों से साक्षात्कार और उपग्रहीय चित्रों के विश्लेषण के बाद लंदन स्थित गैर सरकारी संगठन ने म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या नागरिकों की गोली मारकर हत्या करने और उनके घरों को जलाने का आरोप लगाया है।एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण पूर्व एशिया निदेशक रफेंदी दजामिन ने कहा, "दुखद सैन्य कार्रवाई नागरिक आबादी पर व्यापक और क्रमबद्ध हमले का हिस्सा थी और यह मानवता के खिलाफ अपराध के बराबर मानी जा सकती है।"रफेंदी ने कहा कि म्यांमार सरकार की वास्तविक मुखिया और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की अपने राजनीतिक और नैतिक दायित्व निभाने में विफल हुई हैं।एमनेस्टी ने कहा कि म्यांमार की सेना ने महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया है और पुरुष, महिला और बच्चों की गोली मारकर हत्या की है। ग्रामीणों पर हेलीकॉप्टरों से गोलियां बरसाई हैं और उनके सैकड़ों घर जला दिए गए हैं।भागकर बांग्लादेश पहुंची एक रोहिंग्या महिला फातिमा (32) ने कहा कि सैनिकों ने उसके गांव के पास एक धान के खेत में उसके साथ दुष्कर्म किया।एमनेस्टी ने कहा कि सैनिकों के डर से शिविरों रह रहे या जंगलों में छिपे रोहिंग्या मुसलमान दयनीय दशा में जी रहे हैं।संगठन ने बांग्लादेश से शरणार्थियों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।राखिन में दस लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं, जिन्हें म्यांमार का नागरिक नहीं माना जाता और बहुधा बांग्लदेशी अप्रवासी समझकर त्याग दिया जाता है।--आईएएनएस
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