नोटबंदी के मसले पर सरकार को सड़क से लेकर संसद तक गतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार फैसले के विरोध में लोकसभा और राज्य सभा दोनो सदनो में सरकार का घेराव कर रही है। विरोध के कारण संसद के दोनो सदनो का स्थगन भी अनवरत जारी है। विपक्ष शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर से राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा।
सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और संसदीय लोकतंत्र के गंभीर खतरे में होने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने कांग्रेस की अगुवाई में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से शुक्रवार को मुलाकात कर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति मुखर्जी से मिलकर विपक्षी नेताओं के दल ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कठोर नोटबंदी के फैसले पर दुख जताते हुए उनके मामले पर बयान से इनकार की बात कही गई।
विपक्षी नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय और जनता दल (यू) के शरद यादव शामिल थे। ज्ञापन में कहा गया, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण और अभूतपूर्व है कि सरकार खुद जानबूझकर लोकसभा और राज्य सभा में बाधा उत्पन्न कर रही और कार्यवाही स्थगित कर रही है। यह वरिष्ठ मंत्रियों के इशारे पर किया जा रहा है।’
पार्टियों ने मुखर्जी को दिए ज्ञापन में बताया कि इसके अलावा प्रधानमंत्री विपक्ष को दोषी ठहराकर राष्ट्र को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम संसदीय लोकतंत्र के श्गंभीर खतरेश् में होने को लेकर चिंतित है। उन्होंने दावा किया उनकी तरफ से नोटबंदी के प्रतिकूल असर पर बार-बार चर्चा के लिए प्रयास किया गया लेकिन सरकार का रवैया हरदम विरोधी रहा।’
विपक्षी दलों में तृणमूल कांग्रेस, जनता दल-यूनाइटेड ने राष्ट्रपति से मुलाकात में हिस्सा लिया। वाम पार्टियों ने दल में शामिल नहीं होने पर कहा कि इसमें राष्ट्रपति की कोई खास भूमिका नहीं है। पार्टियों ने सरकार से कहा कि आठ नवंबर के नोटबंदी के कदम से देश में एक गंभीर संकट पैदा हुआ है। इससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।
गौरतलब है कि भारत सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद से एटीएम और बैंकों के बाहर लगी कतारें आज भी जस की तस है। 500 और 1000 के नोटों को तत्काल प्रभाव से बंद किये जाने के 39वें दिन भी बैंकों और एटीएम के बाहर भीड़ लग रही है। अपनी बुुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिन रात लोग रुपये निकालने के लिए कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
आठ नवंबर को की गयी नोटबंदी की घोषणा के बाद से जब बैंक 10 नवंबर को खुले तो इनके बाहर भारी भीड़ देखने को मिली। लेकिन, नोटबंदी के 37 दिनों बाद भी लोगों की पैसे निकालने के लिए एटीएम और बैंको के बाहर कतार अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही है। इससे लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
स्रोतः आईएएनएस
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