केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक के चयन के लिए मानदंड स्थापित करने को लेकर बीते दिन सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को इसके चयन के समय निर्देशों को ध्यान में रख कर चयन करने को कहा है।
इसका बचाव करते हुए केन्द्र सरकार ने कहा कि निदेशक की नियुक्ति का फैसला करने के लिए कमेटी की बैठक दिसंबर के अंत में होगी। सीबीआई की नियुक्ति के लिए समिति में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष तथा भारत के प्रधान न्यायाधीश शामिल रहेंगे।
नियुक्ति के समय निर्देशों को ध्यान में रखने को लेकर न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ तथा न्यायमूर्ति आर.एफ.नरीमन की सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि जब आप नियमित नियुक्ति करें, तो आपको इन निर्देशों (न्यायालय ने इससे पहले के फैसले में जारी किया था) को ध्यान में रखना होगा।
न्यायमूर्ति जोसेफ ने रोहतगी से कहा कि आप न्यायालय के निर्देश और इसके प्रभाव से वाकिफ हैं। जब आप नियमित नियुक्ति करेंगे, आपको इन निर्देशों को ध्यान में रखना होगा।
इसके पूर्व अपने एक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि सामान्यतया सरकार सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति के लिए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के चार बैचों के अधिकारियों पर गौर करेगी। न्यायमूर्ति नरीमन ने पूछा अस्थाना (सीबीआई के अंतरिम निदेशक) में ऐसा क्या खास है।
जैसे ही मुकुल रोहतगी ने जनवरी के तीसरे सप्ताह में एक तारीख की मांग की, गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) कॉमन काज की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह जल्द से जल्द होना चाहिए और उन्होंने सरकार पर लोकपाल सहित ऐसे मामलों पर लंबी तारीख की मांग करने का आरोप लगाया।
इसके बाद न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा कि हम मामले में प्रगति देखेंगे, नहीं तो हम सुनवाई करेंगे और मुद्दे पर फैसला करेंगे।
स्रोत- आईएएनस
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