नोटबंदी फैसले का जोरदार तरीके से बचाव करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि यह निर्णय साल 1971 में ही लिया जाना चाहिए था जब इंदिरा गांधी सरकार की थी।
देश में कालाधन को रोकने के लिए कदम नहीं उठाने हेतु कांग्रेस पर प्रहार करते हुए मोदी ने भाजपा सांसदों से कहा कि हमें ऐसा करने की जरूरत साल 1971 में थी। साल 1971 से ऐसा नहीं किए जाने का हमें भारी नुकसान हुआ।
प्रधानमंत्री ने पूर्व नौकरशाह माधव गोडबोले की पुस्तक का हवाला दिया, जिसमें दर्ज है कि कैसे तत्कालीन गृह मंत्री वाई.वी. चव्हाण ने गलत तरीके हासिल और छिपे धन पर रोक लगाने के लिए नोटबंदी की अनुशंसा की थी।
पुस्तक की विस्तृत चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गोडबोले ने पुस्तक में लिखा है कि इस सुझाव पर इंदिरा ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या आगे कांग्रेस को कोई चुनाव नहीं लड़ना है? चव्हाण को को संदेश मिल गया था और अनुशंसा ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 1971 में इसकी अनुशंसा हर व्यक्ति ने की थी। अगर यह 1971 में हो गई होती तो देश आज इस स्थिति में नहीं होता।
यह बातें पीएम मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन संसद से बाहर आने के बाद कहीं। 500 रूपये और 1000 रूपये के नोटों को अमान्य घोषित किए जाने से देश में नकदी का संकट पैदा हो गया है, इसे लेकर विपक्ष लगातार हंगामा करता आया है। जिस कारण संसद का शीतकालीन सत्र नहीं चल सका।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने देश से आगे पार्टी को रखा है, जबकि भाजपा देश पहले की विचारधारा का अनुसरण करती रही है।
वाम दलों की निंदा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आठ नवंबर के नोटबंदी के फैसले का विरोध करने के लिए वाम दलों की निंदा करते हुए पीएम ने कहा कि कांग्रेस से गठजोड़ कर वाम दलों ने अपनी विचारधारा से समझौता किया है।
प्रधानमंत्री ने दिवंगत मार्क्सवादी नेता ज्योति बसु की उस उक्ति को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी कालाधन के बलबूते ही बची रहीं।
बसु की टिप्पणी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार कालाधन की, कलाधन द्वारा और कालाधन के लिए है।
स्रोत- आईएएनएस
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