नई दिल्ली, 15 दिसम्बर (आईएएनएस)| कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लाइंसेज मैन्यूफैक्च र्स एसोसिएशन (सीईएएमए) एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि अप्लाइंसेज एंड कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (एसीई) उद्योग में विकास के लिए इंस्टॉलेशन, सेवा एवं मरम्मत के क्षेत्रों में कार्यदल को नियुक्त करने के लिए निवेश की आवश्यकता होगी। वर्तमान समय में इस उद्योग में 1.52 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें से 44 प्रतिशत स्किल्ड हैं, जबकि शेष 56 प्रतिशत वर्ग कौशलविहीन है। सीईएएमए ने फ्रॉस्ट एंड सुलिवान के सहयोग से 'स्किलिंग फॉर ड्यूरेबल इंडस्ट्री: एम्प्लायबिलिटी इन कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लाइंस इंडस्ट्री विजन 2020' शीर्षक से पेश रिपोर्ट कार्यबल के इन दो वर्गो के बीच की खाई को पाटने की त्वरित आवश्यकता को दर्शाती है।
इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्योग जगत को कौशल-प्रशिक्षण व प्रमाणन की पेशकश के लिए सरकार के साथ अवश्य ही सहयोग करना चाहिए। इससे उद्योग जगत की मूल्य श्रंखला पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए न सिर्फ सेवा डिलीवरी में सुधार में सहायता मिलेगी, बल्कि इससे फीडबैक मैकेनिज्म भी सशक्त होगा।कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लाइंसेज मैन्यूफैक्च र्स एसोसिएशन (सीईएएमए), अप्लाइंसेज एंड कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (एसीई) उद्योग के शीर्ष औद्योगिक निकाय ने गुरुवार को 37वें वार्षिक समारोह मनाया जिसकी थीम 'स्किलिंग फॉर ड्यूरेबल इंडिया' थी। समारोह में चुनिंदा सदस्यों को असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।इस अवसर पर कानून व न्याय एवं इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पी. पी. चौधरी ने कहा, "स्किल इंडिया पहल सबसे निचले स्तर के लोगों को कौशल युक्त बनाने की दिशा में एक आवश्यक कदम है, इसके लिए लगभग 80 करोड़ लोगों को लक्षित किया गया है। साथ ही यह देखकर काफी संतोष मिलता है कि सीईएएमए इस मुद्दे को इस सहयोगपरक प्लेटफॉर्म पर सोच-समझ कर लेकर आया है।"सीईएएमए के अध्यक्ष मनीष शर्मा ने कहा, "सीईएएमए की स्थापना वर्ष 1978 में सामान्य हितों को साझा करने और अप्लाइंसेज व उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की बढ़ती हुई समस्याआंे का समाधान करने के उद्देश्य से की गयी थी। यह उद्योग प्रत्यक्ष एक नौकरी के मुकाबले 3 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन करता है, लेकिन फिलहाल कुशल कार्यदल की कमी से जूझ रहा है।"-- आईएएनएस
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