नोटबंदी से पैदा हुई देश के किसानों की भयानक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विपक्ष ने गुरूवार को राज्य सभा में केन्द्र सरकार से किसानों के कर्ज माफी को लेकर जोरदार हंगामा किया। विपक्ष के हंगामे के चलते आज भी सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
किसानों की स्थिति का जिक्र करते हुए जनता दल युनाइटेड (जदयू) के नेता शरद यादव ने कहा कि नोटबंदी की वजह से किसानों की दुर्दशा हो रही है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को चाहिए कि किसानों का कर्ज माफ कर दें।
इसका समर्थन करते हुए विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करनी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि किसान का कर्जा माफ करो।
अपना बचाव करते हुए जवाब में सत्तापक्ष के सांसदों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि अगस्ता का पैसा कहां गया?
सदन में हंगामे को बढ़ता देखते हुए सभापति ने सदन की कार्यवाही पहले दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले सदन की कार्यवाही दो बार पहले ही स्थगित हो चुकी थी।
सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे जैसे ही शुरू हुई सभापति ने सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को बोलने की मंजूरी दी, लेकिन सत्तापक्ष के सांसदों ने उन्हें बोलने नहीं दिया।
सदन में सत्तारूढ़ के विरोध को लेकर आजाद ने कहा कि यह सदन के संज्ञान में होना चाहिए कि सत्तारूढ़ पार्टी दोनों सदनों में कामकाज नहीं करने दे रही है। ऐसा देश के इतिहास में पहली बार हो रहा है।
उप सभापति पी.जे.कुरियन ने विरोध कर रहे सांसदों से लगातार शांति बनाए रखने का आग्रह किया, लेकिन नारेबाजी कर रहें सदस्यों ने इसे नजरअंदाज करते हुए एक भी न सुनी।
दोनों सदनों की बाधित हो रही कार्यवाही को लेकर सभापति ने कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि दोनों पक्ष सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न क्यों कर रहे हैं? उन्होंने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र 16 नवंबर को शुरू हुआ था, लेकिन अब तक की कार्यवाही सरकार के नोटबंदी के फैसले पर हंगामे की भेंट चढ़ चुकी है। संसद का मौजूदा सत्र 16 दिसम्बर यानी शुक्रवार को समाप्त हो रहा है।
स्रोत- आईएएनएस
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