भोपाल, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद वृंदा करात ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश पर गुजरात मॉडल थोपने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षो में उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिए एक लाख 30 हजार हेक्टेयर वन भूमि का स्वरूप बदल दिया गया। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) के 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आई करात ने बुधवार को आईएएनएस से कहा, "मोदी की सरकार आने के बाद से वन अधिकार अधिनियम को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए एक लाख 30 हजार हेक्टेयर वन भूमि का स्वरूप बदल दिया गया है। यह जमीन विभिन्न उद्योगों को लगाने के लिए दी जाने वाली है।"
उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में वन अधिकार अधिनियम बना था, जिसका गुरुवार को 10 वर्ष पूरा होने जा रहा है। लेकिन, आदिवासियों को उनका हक नहीं मिल पाया है। यूपीए-दो के अंतिम वर्षो में राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव होने के कारण आदिवासियों के साथ-साख उनके खनिज व प्रकृति पर हमले होते रहे। वही सिलसिला अब भी जारी है।एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मोदी ने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए उद्योगपतियों के लिए काम किया, अब वही काम देश स्तर पर हो रहा है। बीते तीन माह में ही 33 परियोजनाओं के लिए सात हजार हेक्टेयर जमीन दे दी गई। वर्तमान सरकार वन अधिकार अधिनियम को कमजोर करने में लगी हुई है।केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी को वृंदा करात ने आर्थिक व्यवस्था पर बुरा असर डालने वाला फैसला बताया। उन्होंने कहा कि यह बात कम्युनिस्ट पार्टी नहीं बल्कि आर्थिक विश्लेषक कह रहे हैं। इससे जीडीपी पर असर पड़ने वाला है।उन्होंने कहा कि यह सरकार दो करोड़ लोगों को प्रति वर्ष रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आई थी, मगर ऐसा नहीं हुआ। उल्टे लोगों का रोजगार छिनने लगा है।--आईएएनएस
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