रांची, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)| पूरे झारखंड में चाहे छोटे बाजार हों या बड़े, सभी नोटबंदी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राज्य में कुल मिलाकर करोबार में 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ये बातें व्यापारियों ने बताईं हैं।
रेहड़ी पटरीवालों से लेकर बिल्डर तक, नोटबंदी से सभी प्रभावित हुए हैं। लेकिन, विनिर्माण क्षेत्र के मजदूर सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं क्योंकि निर्माण कार्य बंद हो गया है और उन्हें जीविका चलाने में कठिनाई हो रही है।एक दैनिक मजदूर कुंती देवी ने कहा कि काम की तलाश में वह हर रोज बाहर जाती हैं। नोटबंदी के बाद बीते 35 दिनों में केवल सात दिन काम पाने में सफल हुईं हैं।केवल विनिर्माण क्षेत्र के मजदूर नहीं, बल्कि सब्जी विक्रेता और अन्य छोटे दुकानदार भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सब्जियों के दाम भी काफी गिर गए हैं।नोटबंदी के प्रभावों और कम मूल्यों की मुद्राओं के चलन में कम होने के कारण दुकानदारों और ग्राहकों के बीच खुले लौटाने को लेकर अक्सर बहस होती दिखती है।राजधानी के सबसे व्यस्त बाजार जहां थोक और खुदरा दोनों विक्रेता हैं और दैनिक उपयोग की विभिन्न चीजें जैसे फल, सब्जिया, अंडें, मुर्गियां और मेवे मिलते हैं, वहां के व्यापारी नोटबंदी के कारण व्यापार में प्राय: 60 प्रतिशत गिरावट की बात बता रहे हैं।एक दुकानदार आरिफ ने कहा, "मैं क्या कर सकता हूं जब हर व्यक्ति 2000 रुपये के नोट लेकर आता है। छोटी खरीद के लिए हम अपने सारे छुट्टे कैसे दे सकते हैं?"नकद रहित हस्तान्तरणों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल पर दुकानदारों ने कहा कि इस तरह के बाजार में नकदरहित व्यापार संभव नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे नकद रहित हस्तान्तरण शुरू करते हैं तो उन्हें शुल्क के रूप में 2 प्रतिशत देना पड़ेगा, जो कम लाभ पर व्यापार करने के कारण संभव नहीं है।फिर भी, सड़ने वाली वस्तुएं जैसे फल को बहुत दिनों के लिए गोदाम में नहीं रखा जा सकता है। कभी-कभी बड़े घाटे से बचने के लिए उन्हें कम दामों पर बेचना पड़ता है।अन्य व्यापारी भी 25 से 30 प्रतिशत तक घाटे की बात कह रहे हैं। वे कहते हैं कि नोटबंदी के बाद से लोगों की क्रय शक्ति काफी कम हो गई है और वे पैसे काफी सोच समझकर खर्च कर रहे हैं।जौहरी भी नोटबंदी का दंश झेल रहे हैं। एक जौहरी के अनुसार, शादी के मौसम के बावजूद छोटे व्यापारियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।उन्होंने कहा कि सोने के मूल्य में गिरावट हुई है और खरमास शुरू होने पर स्थिति और भी खराब होगी।हाल यह है कि पेट्रोल पंपों पर भी लोगों को उनके 2000 रुपये मूल्य खपाने में कठिनाई हो रही है। सभी प्रमुख पेट्रोल पंपों पर 100 से 200 रुपये के पेट्रोल लेने पर सेल्समैन को 2000 रुपये के नोट लेने से इनकार करते देखा जा सकता है। केवल 2000 रुपये और उससे अधिक राशि के तेल लेने पर उन्हें 2000 रुपये के नोट स्वीकार्य होते हैं।नोटबंदी का प्रभाव रेस्तरां, सिनेमा घरों और राज्य के मल्टीप्लेक्स पर भी देखा जा सकता है। वहां भी कम लोगों के आने की बातें कही जा रही हैं।--आईएएनएस
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