दक्षिण भारत में वरदा तूफान का कहर जारी है। लगातार कहर बरपा रहीं वरदा ने बुधवार को भी चेन्नई में भारी तबाही मचाई। यहां तेज हवाएं चलने से पेड, बिजली के खंभे, संचार सेवाओं के साथ ही परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। कई इलाकों में भारी बारिश का दौर अभी भी जारी है।
वरदा के कहर ने जनजीवन पर खासा प्रभाव डाला है। चेन्नई में तूफान वरदा के दस्तक देने के एक दिन बाद जब लोग सुबह उठे तो उन्हें एक अलग ही मंजर दिखाई दिया। हर जगह टूटे हुए पेड़ दिखे। जिसके कारण सड़के बाधित थी। यहां-वहां साइन बोर्ड और होर्डिग्स पड़े हुए थे। परिसरों की दीवारें क्षतिग्रस्त थीं। टूटे हुए पेड़ों के नीचे दबे वाहन थे, बिजली और दूध की आपूर्ति बाधित थी।
रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लोग तूफान वरदा से मची तबाही को देखकर दंग थे और परिसरों में टूटे पड़े पेड़, पौधों और टहनियों को उठा रहे थे।
वरदा तूफान के कहर से हुए नुकसान को लेकर सरकारी कंपनी में काम करने वाले एक कर्मचारी मुरलीधरन ने कहा कि घर में न तो बिजली थी और न ही दूध। इसलिए हमने एक होटल में जाकर खाने का फैसला किया। होटल में नगदी न लेने से और परेशानी हो रही है।
इस तबाही को लेकर कारोबारी ए.विश्वनाथ ने कहा कि ऐसा लगा रहा है जैसे हम जंगल के बीच में हों।
वरदा के कहर से आई भारी तबाही को लेकर मुख्यमंत्री ओ.पन्नीरसेल्वम ने जारी बयान में कहा कि 4,000 से अधिक पेड़ उखड़ गए हैं।
हालांकि, नगर निगम ने यातायात के लिए सड़कों पर टूटे पड़े पेड़ हटा दिए हैं। रिहायशी इलाकों से इन्हें हटाने में अभी कुछ दिनों का समय लग सकता है। बस सेवाएं दोबारा शुरू कर दी गई हैं। हालात सामान्य होने में अभी कुछ और वक्त लगेगा।
सरकार ने चेन्नई, तिरुवल्लुर और कांचीपुरम जिलों में सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए अवकाश की घोषणा की है।
तूफान वरदा से उत्तर चेन्नई तापीय बिजली केंद्र (एनसीटीपीएस) की 600 मेगावाट इकाई-1 में बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक एनसीटीपीएस की दो अन्य इकाइयों (600 मेगावाट तथा दूसरी 210 मेगावट) में विद्युत उत्पादन ठप हो गया है।
स्रोत- आईएएनएस
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