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कैप्टन कूल ने अपने अंदाज में कप्तानी छोड़ी

New Delhi, Thu, 05 Jan 2017 NI Wire

सिर्फ भारत ही नहीं बल्की पूरे विश्व मे जब भी कभी क्रिकेट का इतिहास लिखा जायेेगा और सफल कप्तानों का जिक्र होगा तो उसमें भारत के महेंद्र सिंह धौनी का नाम बेशक आएगा। इस महान बल्लेबाल ने बुधवार को भारत की एकदिवसीय और टी-20 क्रिकेट टीम के कप्तान पद से इस्तीफा दे दिया है।

एक ऐसे देश में जहां संन्यास लिया नहीं जबरन लिवाया जाता रहा है, धौनी ने अपने चरम पर रहते कप्तानी से हटने का फैसला किया और नई मिसाल पेश की। हालांकि धोनी के इस फैसले से पूरा क्रिकेट जगत सकते में हैं लेकिन मैदान पर ‘कैप्टन कूल’ के नाम से मशहूर धौनी ने कप्तानी छोड़ने का फैसला भी उतने ही शांत अंदाज में लिया ।कैप्टन कूल के कैप्टनशिप कैरियर कुछ इस रहा

क्रिकेट के आॅल टाइम ग्रेट बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के कहने पर चयनकर्ताओं ने धौनी को टीम की कमान सौंपी थी और धौनी ने सचिन की सिफरिश को साबित। अपनी पहली परीक्षा में उन्होंने भारत का नाम इतिहास में दर्ज करा दिया। दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले टी-20 विश्व कप में धौनी पहली बार भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे थे। धौनी ने जीत के सिलसिले को इस तरह शुरू किया कि टीम फाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर विजेता बनकर लौटी।

इसके बाद धौनी जीत और कप्तानी की नई इबारत लिखते चले गए। टी-20 विश्व कप जीत के बाद राहुल द्रविड़ के एकदिवसीय में कप्तानी छोड़ने के बाद धौनी को टीम का कप्तान बनाया गया। धौनी ने इस प्रारूप में भी सफलता के नए आयाम लिखे। 2011 में भारतीय सरजमीं पर खेले गए 50 ओवरों के विश्व कप के फाइनल में धौनी ने छक्का लगाकर 28 साल बाद देश को विश्व कप खिताब दिलाया।

अनिल कुंबले ने टेस्ट में टीम की कप्तानी छोड़ी तो धौनी यहां भी जिम्मा लेने को आगे खड़े थे। नवंबर, 2008 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई श्रंखला के चैथे टेस्ट मैच में धौनी को टीम की कमान सौंपी गई। टेस्ट में भी धौनी ने टीम को पहली बार नंबर-1 बनाया।

धौनी भारत के इकलौते ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी के सभी आयोजनों में टीम को जीत दिलाई है। धौनी की कप्तानी में ही भारत ने 2013 में हुई चैम्पियंस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था।

एकदिवसीय में धौनी ने कुल 199 मैचों में टीम का नेतृत्व किया। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर माने जाने वाले धौनी ने टीम को कप्तान रहते कुल 110 मैचों में जीत दिलाई जबकि 74 मुकाबलों में उन्हें हार मिली। चार मुकाबले टाई और 11 मैचों का कोई परिणाम नहीं निकला। कप्तान रहते हुए एक बल्लेबाज के तौर पर भी धौनी कामयाब रहे। उन्होंने कप्तान रहते एकदिवसीय में 54 का औसत और 86 के स्ट्राइक रेट से 6,683 रन बनाए।

वह विश्व क्रिकेट में सबसे ज्यादा एकदिवसीय मैचों में कप्तानी करने के मामले में तीसरे नंबर पर आते हैं। उनसे ज्यादा आस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और न्यूजीलैंड के स्टीफन फ्लेमिंग ने एकदिवसीय मैचों में कप्तानी की है। धौनी को क्रिकेट इतिहास में करिश्माई कप्तान भी कहा जाता है। क्रिकेट के मैदान पर उन्होंने कई बार ऐसे जोखिम उठाए जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

उन्होंने 72 टी-20 मैचों में टीम की कमान संभाली और 41 जीत टीम को दिलाई और 28 हारों का सामना किया। एक मैच टाई और दो मैचों का परिणाम नहीं निकला। वह टी-20 में सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी करने वाले खिलाड़ी हैं। टी-20 में कप्तान रहते उन्होंने 122.60 के स्ट्राइक रेट से 1112 रन बनाए। टी-20 में वह बिना अर्धशतक लगाने के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। टी-20 में उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 48 रन है।

पांच साल बाद उन्होंने भारत को एक बार फिर विश्व विजेता बनाया। भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश की संयुक्त मेजबानी में खेले गए 50 ओवरों के विश्व कप में भारत ने धौनी के कप्तान रहते ही जीत हासिल की। भारत ने 28 साल बाद इस विश्व कप पर कब्जा जमाया था। 2015 में हुए विश्व कप में धौनी भारत को सेमीफाइनल तक ले गए।

धौनी की कप्तानी में ही भारत ने अब तक खेले गए छह टी-20 विश्व कप में हिस्सा लिया और धौनी की कप्तानी में भारत दो बार विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा। एक बार टीम विजेता बनी तो 2014 में उपविजेता। 2014 के फाइनल में उसे श्रीलंका ने मात दी।

पिछले साल भारत की मेजबानी में हुए टी-20 विश्व कप में भी भारत ने सेमीफाइनल में जगह बनाई, जहां उसे वेस्टइंडीज के हाथों हार का सामना करना पड़ा। धौनी ने कप्तानी में अपनी सफलता इंडियन सुपर लीग (आईपीएल) में भी जारी रखी। उन्होंने इस समय निलंबित चल रही चेन्नई सुपर किंग्स को दो बार आईपीएल का विजेता बनाया जबकि चार बार उपविजेता बनी। चेन्नई ने धौनी के कप्तान रहते हर साल आईपीएल के सेमीफाइनल में जगह बनाई।

धौनी ने दिसंबर, 2014 में टेस्ट से संन्यास ले लिया था। धौनी ने 60 टेस्ट मैचों में टीम की कमान संभाली जिसमें 27 में उन्हें जीत और 18 में हार मिली जबकि 11 मैच ड्रॉ रहे। इस तरह क्रिकेट के इस महानसेनापति ने अपने जीवन का सबसे बेहतरीन योगदान देकर विश्व में भारत को मान और सम्मान दिलाया।


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